Xxx rakhi alam gir

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The Symptoms of The Day of Resurrection, mentioned in Islam are the ones which can be seen with our own eyes these days. Bismillah hir Rahman nir Raheem In the name of ALLAH, The Most Gracious, The Most Merciful English Version The Day of Judgement Signs & Symptoms of The Day of Judgement) The Day of Judgement (Impact of the day of judgement) It is a fact that with the passage of every moment we are getting closer to qayamat (the Day of judgement).

Nishaniyan Qayamat ke Asar ki jinhe ham urdu me bhi kehte hai. People are having the misconception that this day is too far from us, without realizing that our ancestors who were also having the same thought, came into this world and now they are lying in their respective graves.

For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts.

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हम सब एक सेक्युलर ( पंथनिरपेक्ष ) देश में रहते हैं | सेक्युलरिज्म एक सबसे उम्दा मानवीय विचार है |जिसमें कोई भी नीतिगत व्यवस्था ,प्रक्रिया (नीतिगत )या मानसिकता किसी भी फिरके (पंथ ) या साम्प्रदायिक अवधारणाओं – से प्रभावित नहीं होती | सेक्युलरिज्म की पूरी अवधारणा -साम्प्रदायिक सौहार्द की अवधारणाओं पर खड़ी है |मोहनदास करमचंद गाँधी साम्प्रदायिक सौहार्द के बड़े पक्षधर थे |उन्होंने ‘ ईश्वर अल्लाह तेरो नाम ‘ भजन को प्रचलित किया | मतलब ईश्वर और अल्लाह एक ही हैं | उनके ज़माने के साम्प्रदायिक सदभाव वाले और सेक्युलर लोग यह सुरीला गीत सभी मंदिरों में गाते थे | और यह आज भी गाया जाता है | हम यह गाना स्कूलों एवं सामूहिक जमावडों में गाते गाते बड़े हुए हैं |विश्व हिन्दू परिषद् , राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और आर्यसमाज को प्रायः फिरकापरस्त और दक्षिणपंथी कहा जाता है | उन पर आरोप लगाया जाता है कि वे साम्प्रदायिक सदभाव नष्ट करने पर तुले हुए हैं | हाल में ही जिस प्रकार यह फिरकापरस्त ताकतें पनप रही हैं और उपमहाद्वीप की शांति और सौहार्द को आहात कर रही हैं , उससे देश और दुनिया का बौद्धिक वर्ग चिंतित है | जब कभी भी कहीं आतंकी हमला होता है तब ये फिरकापरस्त ताकतें उसे मुस्लिम आतंकवाद करार देती हैं| और पंथनिरपेक्ष मीडिया को अपनी पूरी ताकत और प्रयत्न यह जताने में खर्च करने पड़ते हैं कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता | उन्हें अच्छे मुसलमानों और बुरे हिन्दुओं की वीडियो और फिल्मों के साथ पेश होना पड़ता है ताकि मुस्लिमों के प्रति गलत अवधारणाओं के सामने संतुलन किया जा सके | मालेगांव जैसी जगहों पर जहाँ गौवध प्रचुरता से चलन में है ,वहां के छोटे -मोटे बम धमाकों को बढ़ा -चढ़ा कर प्रसारित करना पड़ता है | फिर राज्य की सारी व्यवस्थाएँ इन तथाकथित दक्षिणपंथी ताकतों को पकड़ने के लिए हरकत में आती हैं |यह अलग बात है की कुछ बड़े आतंकी हमले शायद इतने बड़े नहीं होते ताकि उनके धमाके से राजकीय व्यवस्था जागृत हो सकें | इसीलिए हम वर्षों से अफ़ज़ल की सजा का इंतजार कर रहे हैं | क्योंकि एक साधारण अवधारणा बनी रही है कि इस देश का बौद्धिक वर्ग यह मान चुका है कि हिन्दू बहुत ही फिरकापरस्त बन चुके हैं | हिन्दू अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले तमाम आतंकवाद के लिए मुसलमानों और खास तौर पर मुल्ला -मौलवियों को दोषी ठहराने पर तुला हुआ हैं | यह तो सिर्फ संयोग और पाश्चात्य मीडिया का षडयंत्र ही है कि अधिकतर आतंकी और सोमालियाई समुद्री डाकुओं का जो गिरोह प्रकाश में आया है -वे भी मुस्लिम ही निकले हैं | पर वास्तविकता फिर भी यही है कि हिन्दू आतंकवाद कहीं ज्यादा खतरनाक है और इसलिए उसको रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए !

अगले लेखों में हम हिन्दू और इस्लामिक आतंकवाद और उनके कारणों का मूल्यांकन जरूर करेंगे| पर अभी हम एक व्यवहारिक समाधान सूचित कर रहे हैं | जिससे सभी हिन्दू और मुस्लिम साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा दें और सेक्युलरिज्म को प्रोत्साहित करें |इस समाधान के लिए मैं मोहनदास करमचंद गाँधी से प्रेरित हूँ | जो इस समाधान को स्वीकार कर लेते हैं , वह सच्चे सेक्युलर हैं और इससे इंकार करने वाले असली फिरकापरस्त हैं |क्योंकि जो मैं दे रहा हूँ, वह केवल गांधीजी के ‘ ईश्वर अल्लाह तेरो नाम’ का ही विस्तार है|सेक्युलरिज्म को परखने का समाधान यह है –1.नित्यप्रति सभी मंदिरों में प्रार्थना के बाद लाउडस्पीकर से कुरान की आयतों का पाठ किया जाए| और सभी मस्जिदों में गीता के श्लोक व वेद मन्त्रों का पठन हो|2.सभी मस्जिदों व मंदिरों से लाउडस्पीकर पर घोषणा की जाए और उनकी दीवारों पर लिखा जाए कि ईश्वर और अल्लाह एक हैं ,राम और रहीम एक हैं ,गीता और कुरान एक हैं ,काशी और काबा एक हैं|3.मस्जिदों में हवन हो और मंदिरों में नमाज | और इस प्रक्रिया को प्रमुख मंदिरों और मस्जिदों से करने की पहल की जाए | अग्निवीर ने भारत के कई प्रमुख मंदिरों से ऐसा करने की चर्चा की है एवं उनका दृष्टिकोण सकारात्मक है| आर्य समाज की सर्वप्रमुख बौद्धिक संस्था – परोपकारिणी सभा – ने तो अरबी और कुरान गुरुकुल में सिखाने के लिए मौलवी भी नियुक्त कर दिए हैं| अब मुस्लिमों की बारी है कि वे जामा मस्जिद जैसे प्रमुख मस्जिदों की सूचि लेकर सामने आएं | जो यह सब करने को तैयार हैं |अग्निवीर अपनी वेबसाइट के प्रथम पृष्ट पर प्रमुखता से यह देने को तैयार है कि ईश्वर और अल्लाह एक हैं ,राम और रहीम एक हैं ,गीता और कुरान एक हैं ,काशी और काबा एक हैं | हम मंच पर इसकी घोषणा हिन्दू अग्रणी नेता से करवाने को तैयार हैं |इस्लामिक रिसर्च फाऊंडेशन भी ऐसा करके दिखलाए|अग्निवीर स्वयं और अन्य हिन्दू विद्वानों से घोषणा करवाने को तैयार है कि –पर हाँ , यदि जाकिर नाइक ,बुखारी और इस्लाम के अन्य प्रतिनिधि इन बातों को मानने से इंकार करते हैं और हिन्दू फिर भी ‘ईश्वर अल्लाह तेरो नाम ‘गाना जारी रखते हैं तो हिन्दुओं से ज्यादा नासमझ (मूर्ख ) समुदाय और कोई भी नहीं होगा | क्योंकि जो ‘शेष नाग ’के भ्रम में साँप (कोबरा )को दूध अर्पित करते हों और जानबूझ कर उसे अपने सिर पर बैठाते हों , वह तो डसे जाने के ही पात्र हैं | जाकिर नाइक और बुखारी अपने क्रिया कलापों द्वारा प्रमाणित करके दिखाएँ की वे वास्तव में शेष नाग हैं – आस्तीन के साँप नहीं |और जब तक ये मुस्लिम प्रतिनिधि सेक्युलरिज्म की इस कसौटी को पार करने से इंकार करते हैं तब तक इन तथा कथित बुद्धिजीवियों को कोई अधिकार नहीं है कि वे हिन्दू संगठनो को कट्टरपंथी और फिरकापरस्त कहें |मोहनदास सिर्फ हिन्दुओं से ही ‘ईश्वर अल्लाह तेरो नाम ’ गवा सके जिसे आज भी मंदिरों में गाया जा रहा है | देश और विश्व में सच्चे साम्प्रदायिक सौहार्द को लाने के लिए यह ख्याति प्राप्त गीत मस्जिदों और आइ आर एफ के जलसों में भी गूंजना चाहिए |पर दुःख की बात है की आज तक कोई मुसलमान मौलवी या प्रचारक या संस्था यह कहने की हिम्मत नहीं कर पायी कि“मुस्लिम और गैर -मुस्लिम सभी अच्छे इन्सान जन्नत हासिल करेंगे |”“ईश्वर अल्लाह तेरो नाम”“ईश्वर और अल्लाह एक हैं ,राम और रहीम एक हैं ,गीता और कुरान एक हैं ,काशी और काबा एक हैं”This article is also available in English at By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings.

That would be the day when no one would be standing by us neither aur assets not our body. So, we should believe ALLAH Subhanahu Wata ‘Ala with the bottom of our hearts and also believe in the reality of the Day of Resurrection. We should keep thanking ALLAH Azzawajal for all the bounties HE has granted us ever.

If we fail to do so, we will regret later on and nothing can save us from facing the unbearable wrath.

This is highly possible that one day when we will be busy in planning for our future and building up our status in society, suddenly this moment would come into our life and everything would be perished. May ALLAH Subhanahu Wata ‘Ala grant us the strength to do pious/good deeds and save us from all the evils. The signs of the Resurrection have been clearly explained by many Prophets and very deeply explained by Our Beloved Prophet Hazrat Mu’hammad Sall ALLAHU ‘Alayhe Wasallam as well because no Prophet will come after Him. It has been mentioned in Sahih Muslim, Huzaifa Radi ALLAHU Anhu has referred that once Our Beloved Prophet Hazrat Mu’hammad Sall ALLAHU ‘Alayhe Wasallam was standing amongst us and there was not a single story which He had missed telling us about all the incidents that will happen before the Day of Qiyamah. One will remember all these events if he wanted to remember them and one will forget these events if he wanted to forget them.

He will surely assemble you for the Day of Resurrection, about which there is no doubt.

Those who will lose themselves [that Day] do not believe. There is not even a single thing on this earth that can give its preponderance of immortality neither your career nor your marriage and wealth.

We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models.

Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism.

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